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फ़ीमेल कंडोम, जिसे आंतरिक कंडोम भी कहा जाता है, ने स्त्रियों के लिए सुरक्षित सेक्स के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। डायफ्राम, स्पॉन्ज, आईयूडी और सरवाइकल कैप जैसी विधियों के विपरीत, जिनके इस्तेमाल के लिए मेडिकल सहायता लेनी होती है और वे लंबे समय तक शरीर के अंदर रहते हैं, इन्हें जरूरत के आधार पर घर पर पहना और हटाया जा सकता है। 

उपयोग और प्राप्त करने में आसान होने के कारण यह अधिक से अधिक स्त्रियों को सुरक्षित सेक्स करने का अधिकार उनके हाथों में देने में मददगार हो रहा हैं। फ़ीमेल कंडोम एक व्यावहारिक विकल्प है और स्त्रियों के लिए यह ज़रूरी कि वे उसके प्रभाव को समझें ताकि व्यापक रूप से इसका उपयोग करना शुरू करें।

फ़ीमेल कंडोम कितने प्रभावी हैं का संक्षिप्त जवाब यह है कि सही तरीके से उपयोग किए जाने पर वे 95% प्रभावी होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण शब्द सही इस्तेमाल ही है। आइए इस आंकड़े को समझने में आपकी मदद करें कि फ़ीमेल कंडोम कितनी अच्छी तरह काम करता  है और इसका सकारात्मक परिणाम पाने के लिए क्या किया जा सकता है।

फ़ीमेल कंडोम और उनका प्रभाव 

आंकड़ों के आधार पर  फ़ीमेल कंडोम गर्भधारण को रोकने में 95% प्रभावी हैं।

गलत उपयोग के कारण, उनकी प्रभावशीलता 79% तक कम हो सकती है।

इसका मतलब है कि गर्भनिरोधक की एक विधि के रूप में फ़ीमेल कंडोम का उपयोग करने वाली 100 में से 21 महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं।

यह थोड़ी विचित्र बात है कि बहुमत के आंकड़े प्रेग्नेंसी से संबंधित उनकी प्रभावशीलता के इर्द-गिर्द घूमते हैं, गर्भनिरोधक और एसटीआई को रोकने में उनकी भूमिका के बारे में कोई बात नहीं करता, भले ही ये सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अवरोधकों में ये सबसे लाभकारी हों। 

एक शोध के अनुसार कि फ़ीमेल कंडोम के इस्तेमाल से एचआईवी की घटनाओं में 80 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इस आंकड़े के अनुसार, यह भी निष्कर्ष निकलता है कि अन्य यौन संक्रमण और बीमारियों के लिए भी यही सच है।

फ़ीमेल कंडोम की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए 

तथ्यों और आंकड़ों का विश्लेषण करें तो यही निष्कर्ष निकलता है कि फ़ीमेल कंडोम का सही इस्तेमाल उनके प्रभाव को कई गुना बढ़ा सकता है। यदि आप फ़ीमेल कंडोम लेने जा रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि आप उनका सही उपयोग कर रहे हैं। यहाँ कुछ बातें ध्यान में रखना ज़रूरी हैं:

  • फ़ीमेल कंडोम को अपने साथी के साथ यौन संपर्क के किसी भी रूप में योनि के अंदर रखने की आवश्यकता होती है। इसमें ओरल सेक्स और वाइब्रेटर और डिल्डो का उपयोग (यदि दोनों इसे इस्तेमाल कर रहे हैं) शामिल हैं।
  • आईएस / आईएसओ प्रमाण पत्र के साथ आने वाले कंडोम का उपयोग करें। यह सुनिश्चितता की एक मुहर है कि उत्पाद सुरक्षा के उच्चतम मानकों के अनुरूप है।
  • सुनिश्चित करें कि जब आप पैकेट से निकालते हैं तो कंडोम निकले या फटे नहीं।
  • पेनिट्रेशन के दौरान इस बात का अतिरिक्त ध्यान रखें कि पेनिस कंडोम के अंदर जा रहा है कि नहीं। यदि कंडोम के बाहर और योनि के किनारे तक प्रवेश होता है, तो आप असुरक्षित यौन संबंध रख रहे हैं।
  • भले ही आंतरिक कंडोम लुब्रिकेटेड हों, अगर आप इसे डालते समय असुविधा का अनुभव करते हैं या आमतौर पर योनि में डालने के दौरान असहजता होती है, तो कुछ चिकनाई का उपयोग करके इसे काफी दूर तक स्लाइड करें ताकि यह लगा रहे।
  • हालांकि, कभी-कभी कंडोम योनि के अंदर बहुत दूर तक जा सकता है। जब ऐसा होता है, तो आपके साथी का स्पर्म आपकी योनि की दीवारों के संपर्क में आ जाएगा और सुरक्षा कम हो जाएगी। अंगूठे तक की दूरी पहुँच जाने पर आपको कंडोम को आगे डालना बंद कर देना चाहिए, कंडोम का लगभग एक इंच आपकी योनि के बाहर होना चाहिए।
  • सेक्स के बाद, बॉडी फ्लूइड के मिश्रित होने की संभावना हो सकती है इसलिए कंडोम को तुरंत हटा दें।
  • जलन या चकत्ते के खतरे को कम करने के लिए, लेटेक्स के बजाय पॉलीयुरेथेन या नाइट्राइल से बने महिला कंडोम का उपयोग करें।
  • पुरुष और स्त्री कंडोम को एक साथ प्रयोग न करे, क्योंकि फिर यह टूट सकता है और इसका प्रभाव कम हो सकता है 

इन सभी बातों को ध्यान में रखना आपको सेक्स के आनंद में बाधक लग सकता है, लेकिन थोड़ी सी देखभाल जीवन में आने लंबे बुरे परिणामों से बचाने में सहायक हो सकतीं हैं। समय और अभ्यास के साथ, ये स्वाभाविक रूप से आप कर सकेंगी।

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