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अगर आप प्रेग्नेंसी (गर्भाधान) से बचने के तरीके खोज रहे हैं या प्रेग्नेंट होना चाहते हैं तो यह आलेख आपके लिए है। 

क्या आपने कभी सोचा है कि प्रेग्नेंसी किस तरह होती है? आप कहेंगी कि यह रॉकेट साइंस नहीं है। असुरक्षित सेक्स (संभोग) के कारण प्रेग्नेंसी होती है। सही जबाव।

लेकिन आपको इसकी सही प्रक्रिया पता है? 

आपने ‘सुरक्षित दिनों ‘के बारे में सुना होगा – जब प्रेग्नेंसी की कम संभावना रहती हैं। या फिर ओवुलेशन के दिन जब प्रेग्नेंसी की सबसे अधिक संभावना रहती है। लेकिन सेफ़ दिनों और ओवुलेशन के दिनों में एक स्त्री के शरीर के अंदर क्या बदलाव होता है? आइए उस रहस्य को सुलझाते हैं। 

स्त्री के शरीर के अंदर 

तो आइए शुरू करते हैं इस बात से कि प्रेग्नेंसी के दिनों में एक स्त्री के शरीर के नादार क्या बदलाव आता है जिससे प्रेग्नेंसी होती है। अधिकांश स्त्रियों में मासिक धर्म 10 से 15 की उम्र में शुरू हो जाता है। इस दौरान उनके अंदर अंडे (एग) का निर्माण होता है और उनके शरीर में गर्भाधान की क्षमता आ जाती है। इसी समय ओवुलेशन या अंडोत्सर्ग की प्रक्रिया भी शुरू होती है। लेकिन ओवुलेशन होता क्या है? 

तो हर महीने स्त्री के रीप्रोडक्टिव सिस्टम द्वारा ओवरी से (रीप्रोडक्टिव सेल) एक ओवम या एग (अंडे ) का उत्सर्जन होता है। ओवुलेशन सामान्यतः एक दिन के लिए होता है और स्त्री के मासिक धर्म चक्र के बीच में यानी उसकी दूसरी माहवारी के बारहवें या सोलहवें दिन पहले होता होता है ( लगभग दो हफ्ते पहले)

 कम शब्दों में कहे तो यह समय स्त्री का सबसे उर्वर समय होता है जब एक स्त्री के प्रेग्नेंट होने की संभावना सबसे अधिक रहती है। 

इसलिए अगर आप या आपके पार्टनर प्रेग्नेंसी की योजना बना रहे तो इन दिनों में असुरक्षित सेक्स करें। अगर आप प्रेग्नेंसी नहीं चाहते तो कौंडोम का इस्तेमाल करें।

पुरुष के शरीर के अंदर

अब समझते हैं पुरुष के शरीर के अंदर की बनावट। प्युबर्टी की आयु आने पर (9 से 15 वर्ष) एक पुरुष के टेस्टिकल (अंडकोश) में स्पर्म सेल (पुरुष रीप्रोडक्टिव सेल) का निर्माण शुरू हो जाता है। लाखों नन्हें स्पर्म सेल पुरुष के शरीर के अंदर रहते हैं और इजैकुलेशन की प्रक्रिया के दौरान सीमेन के माध्यम से निकलते हैं। पुरुष के मूत्राशय के नीचे स्थित ग्लैंड द्वारा सीमेन का निर्माण होता है।

टेस्टिकल को स्पर्म फ़ैक्टरी भी कहा जाता है। हर बार इजैकुलेशन के दौरान पुरुष द्वारा दस करोड़ स्पर्म का उत्सर्जन होता है। लेकिन प्रेग्नेंसी के लिए इतने स्पर्म की ज़रूरत नहीं पड़ती। स्त्री के एग को निषेचित करने के लिए सिर्फ़ एक स्पर्म की ज़रूरत होती है। 

जब दो मिलकर एक होते हैं

एक पुरुष और स्त्री के बीच सेक्स के कारण प्रेग्नेंसी होती हैं जब एक पुरुष का पेनिस स्त्री वेजाइना के अंदर प्रवेश करता है। अगर उन्हें प्रजनन की इच्छा होती है तो पुरुष द्वारा अपना सीमेन स्त्री के वेजाइना में उत्सर्जित कर दिया जाता है जिसमें स्पर्म सेल होते हैं। स्पर्म सेल सर्विक्स से होकर गर्भाशय के परिपक्व ओवम या एग सेल से मिलता है। जैसे ही यह ओवम निषेचित होता है, यह गर्भाशय की दीवार पर ख़ुद को स्थापित कर लेता है। यह प्रेग्नेंसी का प्रथम चरण होता है।

आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं ?

प्रेग्नेंसी का पहला लक्षण उस महीने माहवारी का नहीं होना है। जब ओवम स्पर्म द्वारा निषेचित हो जाता है तो माहवारी रुक जाती है। अगर ओवम निषेचित नहीं होता है तो शरीर द्वारा संभावित प्रेग्नेंसी के लिए बनाए ये ब्लड सेल अगली माहवारी में बाहर आ जाते हैं। ओवम फिर से शरीर द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है।

 प्रेग्नेंसी के अगले चरण में निषेचित ओवम ( एम्ब्र्यो- भ्रूण ) फीटस में विकसित हो जाता है जो अगले नौ माह में बच्चे के रूप में विकसित होता है। फीटस लगभग चालीस हफ्ते या नौ महीने में विकसित होता है जिसके बाद सामान्य डिलिवरी में बच्चा वेजाइना द्वारा बाहर आता है। 

बहुत सारे चिकित्सीय कारणों से कई बार बच्चे को सर्जरी द्वारा बाहर निकालना होता है जिसे सिजेरियन डिलिवरी कहते (सिजेरियन सेक्शन, सी सेक्शन ) हैं। इस प्रक्रिया में माँ के पेट या गर्भाशय से सर्जरी द्वारा काट कर बच्चे को निकाला जाता है। यह प्रक्रिया डॉक्टर द्वारा तब अपनायी जाती जब वेजाइना द्वारा डिलिवरी माँ और बच्चे के लिए सुरक्षित नहीं हो। 

अगर आप गर्भवती होना चाहते हैं 

अगर आप गर्भवती होना चाहते हैं तो हर दूसरे या तीसरे दिन बिना किसी निरोधक के सेक्स करें। ओवुलेशेन के दौरान सेक्स से प्रेग्नेंसी की संभावना सबसे अधिक रहती है। हालांकि यह याद रहे कि वेजाइना के अंदर स्पर्म दो या तीन दिनों तक रह सकता है। अगर आपका सेक्स ओवुलेशन से पहले हुआ हो तो आपके शरीर में उस दौरान ताजा स्पर्म होगा। 

अगर आप प्रेग्नेंसी रोकना चाहते हैं 

सुरक्षित सेक्स करें। यह याद रखना ज़रूरी है कि ओवुलेशन की प्रक्रिया प्रेग्नेंसी के लिए सबसे उर्वर समय है, स्त्री के ओवुलेशन का एकदम नियत समय तय करना मुश्किल है, इसलिए ज़रूरी है कि गर्भ रोकने वाले साधनों का इस्तेमाल किया जाये। ऐसे कई साधन उपलब्ध हैं। सबसे सुरक्षित और आरामदायक साधन कॉन्डोम का जो पुरुष द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। ये सस्ते हैं और इसने यौन संक्रमण भी रोके जा सकते हैं। महिलाओं के लिए भी कॉन्डोम उपलब्ध हैं। और भी कई गर्भ निरोधक उपाय हैं जैसे की खाने वाली गोलियाँ और इंजेक्शन जो एक निश्चित अवधि तक काम करते है। 

सेक्स के बिना प्रेग्नेंसी 

कई बार मेडिकल दिक्कतों के कारण गर्भाधान में दिक्कत आती है, ऐसे में लोग गर्भाधान के अन्य तरीकों जैसे वीट्रो फर्टिलाइज़ेशन (आईवीएफ) द्वारा गर्भाधान करते हैं। इस प्रक्रिया में अंडे का स्पर्म द्वारा निषेचन प्रयोगशाला में डिश या टेस्ट ट्यूब में होता है। 

अंडे को ओवरी से सर्जरी द्वारा निकालकर पुरुष के स्पर्म सेल से निषेचित किया जाता है। फिर निषेचित भ्रूण को स्त्री के गर्भाशय में डाला जाता है। बाद के चरण सामान्य प्रेग्नेंसी की तरह ही होते हैं। इस प्रक्रिया में एग और स्पर्म किसी जोड़े के लिए जाते हैं या फिर किसी गुमनाम डोनर द्वारा दिये गए एग या स्पर्म से भी निषेचन कराया जाता है। 

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