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गर्भ निरोध के कई तरीक़े होते हैं – प्राकृतिक भी और और बाजार में उपलब्ध कृत्रिम उपाय. प्राकृतिक उपाय सदियों से चले आ रहे हैं, मगर ये विधियां गर्भ धारण से संपूर्ण सुरक्षा नहीं देती.  

फिर भी कई लोग निरोध के इन तौर-तरीकों पर भरोसा करते हैं. इसके पीछे कई वजहें हैं – मसलन कॉन्डोम, पिल्स अथवा यू आई डी जैसे कृत्रिम उपायों के प्रति समुचित जानकारी का अभाव और इनसे जुडी कुछ मिथ्या. आईये प्राकृतिक तौर पर गर्भ धारण से बचने के तरीको के बारें में आपकी जानकारी बढ़ाते हैं बताते हैं कि क्यों इन पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता.

पुरुष द्वारा पुल आउट (लिंग को बाहर निकाल लेना)

गर्भ निरोध के लिए पुल आउट या लिंग बाहर निकाल लेने की प्रक्रिया संभवतः सर्वाधिक इस्तेमाल में लायी जाने वाली प्रक्रिया है. सेक्स करते हुए अंतिम समय में, इजाकुलेशन से ठीक पहले लिंग निकाल लेने को ‘पुल आउट’ कहा जाता है. इससे वीर्य योनी के अन्दर नहीं जाता है और गर्भ धारण की संभावना कम हो जाती है. 

एजकुलेशन से पहले लिंग से निकलने वाले द्रव या लिक्विड (जिसे प्री-कम कहते है) में भी स्पर्म की मात्रा होती है, अतः पुल आउट को पूर्णतः सुरक्षित गर्भ निरोध उपाय नहीं माना जाता है. पुल आउट में यौनिक संक्रमण का ख़तरा बना हुआ रहता है. 

बहुत बार पुरुषों को पता भी नहीं हो पता कि पुल आउट का उपयुक्त समय क्या है, और सही समय में बाहर न निकाल पाने की अवस्था में  वीर्य के योनी में ही रह जाने का ख़तरा भी होता है, जो कि गर्भ धारण की संभावना को ख़ूब बढ़ा देता है. 

ऐसे में विशेषज्ञ कंडोम पहनने की सलाह देते हैं. कंडोम पहनने से लिंग से योनि में वीर्य या स्पर्म जाने का खतरा बिलकुल ख़त्म हो जाता हैं.

सुरक्षित समय में सम्भोग 

यह भी सब ज्यादा प्रचलित प्राकृतिक गर्भ निरोधक उपायों में से एक है. मासिक चक्र के उन दिनों में जब स्त्रियाँ ओव्युलेट नहीं कर रही होती हैं, माना जाता है कि वह समय सम्भोग के लिए बेहद सुरक्षित होता है. 

ओव्यूलेशन की प्रक्रिया में ओवरीज़ (अंडाशय) से एक या एक से अधिक एग निकलते हैं जो फैलोपियन ट्यूब में प्रवेश करने के लिए तैयार होते हैं. इन सुरक्षित दिनों में एग का निकलना बंद हो जाता अतः माना जाता  है कि सम्भोग के पश्चात उनका स्पर्म से कोई संपर्क नहीं होगा अतः गर्भ धारण की सम्भावना कम हो जाती है. ओव्यूलेशन मासिक चक्र के शुरू होने के करीब 10-14 दिन पहले होता है और इस दौरान स्त्रियों की जनन क्षमता बहुत बढ़ी हुई होती है.

सुरक्षित दिन या सेफ़ डेज एक मिथ्या अथवा भुलावे के अतिरिक्त कुछ और भी नहीं है. वैज्ञानिक तथ्यों  के अनुसार स्पर्म 7 दिनों तक फैलोपियन ट्यूब में जिंदा रह सकता है. इसका मतलब यह हुआ कि सुरक्षित दिनों में सम्भोग करने के बाद भी जब वापस ओव्यूलेशन की क्रिया शुरू होती है, बहुत संभावना बच  जाती है कि गर्भ ठहर जाए. और इससे यौनिक संक्रमण वाली बीमारियों का ख़तरा भी बना हुआ रहता है.

ऐसे में विशेषज्ञ कंडोम या दूसरे गर्भ निरोधक जैसे की गोली की सलाह देते हैं. फिर चाहे सेफ दिन हो या नहीं, गर्भ धारण का खतरा नहीं है. 

आउटरकोर्स

सम्भोग के सुरक्षित तरीके के रूप में से एक आउटरकोर्स भी हैं. आउटरकोर्स में चूमना, यौनिक अंगों को छू एवं सहला कर पार्टनर को ओर्गाज्म दिलवाना, ख़ुद से मास्टरबेशन करना, सेक्स टॉय का इस्तेमाल करना आदि चीज़ें आती हैं. यानी सेक्स की वे तमाम प्रक्रियाएं होती हैं जिसमें योनी और लिंग का मिलन नहीं होता है अर्थात इंटरकोर्स नहीं होता है.  कुछ लोग आउटरकोर्स में उन सेक्स क्रियाओं को भी शामिल करते हैं जिसमें किसी भी तरह का लिंग प्रवेश न हो, मसलन ओरल और एनल.  

चूँकि योनि का लिंग में प्रवेश नहीं होता, आउटरकोर्स में गर्भ धारण का खतरा नहीं होता. इसमें यौनिक संक्रमण से बचाव भी हो जाता है (पर पूरी तरह से नहीं).

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