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गर्भ निरोधक गोलियां – नहीं नहीं! इन्हें मत खाना, तुम्हारा वजन बढ़ जाएगा। ‘

‘पिल्स – इनमें हार्मोन होता है। बाद में गर्भधारण करने में परेशानी होगी। ‘

कंडोम? मजा किरकिरा हो जाता है।

‘अरे तुम ब्रेस्टफीडिंग कराती हो ना, टेंशन ना लो, प्रेगनेंट नहीं होगी। ‘

 स्खलन से पहले लिंग बाहर निकाल लेना – प्रेगनेंसी की कोई चिंता नहीं! ‘

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऊपर लिखी सभी बातें मिथक हैं। जी हां, सभी!

हममें से बहुत से लोगों ने बर्थ कंट्रोल या गर्भनिरोधक विधियों के बारे में ऊपर दी गई बातें या या इससे कुछ अलग बातें ज़रूर सुनी होंगी। अक्सर लोग हमें इनमें से गर्भनिरोध की कई विधियों का इस्तेमाल करने से मना करते हैं। सलाह देने वाले हमारे वे दोस्त या रिश्तेदार होते हैं जिनके गर्भनिरोधक तरीके सफल नहीं हुए और उन्हें अनचाही प्रेगनेंसी से गुजरना पड़ा। जब बर्थ कंट्रोल के बारे में विश्वसनीय जानकारी की बात आती है तो इसके बारे में अभी भी बहुत कुछ जानने की ज़रूरत है।

हमारे आसपास गर्भनिरोध की विधियों से जुड़े बहुत सारे मिथक फैले हुए हैं जिसके कारण असलियत छिप जाती है।

अगर बर्थ कंट्रोल की बात करें तो सभी तरीके हर किसी के लिए अनुकूल नहीं होते हैं। हर व्यक्ति अलग है और उनकी ज़रूरतें भी अलग हैं। इसलिए यदि एक तरीका किसी के अनुकूल नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह विकल्प ही गलत है। इंटरनेट पर मौज़ूद सभी जानकारियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और बेहतर सलाह के लिए हमेशा डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

इसलिए गर्भनिरोधक से जुड़े मिथकों को दूर कर हमेशा सही जानकारी हासिल करें।

मिथक – बर्थ कंट्रोल हमेशा प्रभावी होता है

महिला और पुरुष दोनों के लिए बर्थ कंट्रोल के बहुत से तरीके इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। लेकिन सभी बर्थ कंट्रोल सौ प्रतिशत प्रभावी नहीं हैं। कंडोम फट सकता है, गोलियों का सेवन भूल जाने पर प्रेगनेंसी हो सकती है और सुरक्षित दिनों (जब ओव्यूलेशन नहीं होता है) के दौरान सेक्स करना भी इस बात की गारंटी नहीं है कि आप प्रेगनेंट नहीं होंगी।

प्रेगनेंसी के जोखिम से बचने के लिए हमेशा गर्भनिरोधक के दो तरीकों का उपयोग करना चाहिए। जैसे: यदि कोई महिला गर्भनिरोधक दवा ले रही हो तो वह अपने पुरुष पार्टनर से कंडोम का इस्तेमाल करने के लिए कह सकती है। ठीक इसका उल्टा भी कि अगर आप कंडोम का इस्तेमाल कर रहे हैं तो भी पार्टनर को गर्भनिरोधक दवा लेने के लिए कहें।

मिथक – पहली बार सेक्स करते समय कंडोम की ज़रूरत नहीं होती है

जब आप पहली बार सेक्स करते हैं तो भी आप गर्भवती हो सकती हैं। यह पूरी तरह मिथक है कि पहली बार सेक्स करने पर प्रेगनेंसी नहीं होती है। प्रेगनेंट करने के लिए एक स्पर्म ही काफ़ी है।

कभी-कभी स्खलन से पहले लिंग से निकलने वाले फ्लूइड में स्पर्म मौजूद होते हैं। इस फ्लूइड को प्री-इजेकुलेट कहते हैं। इसलिए सिर्फ़ एक बार नहीं बल्कि हर बार सेक्स के दौरान कंडोम या कोई अन्य गर्भनिरोधक का इस्तेमाल ज़रूर करें।

मिथक – गर्भ निरोधकों में हार्मोन होते हैं जिससे वजन बढ़ता है

बर्थ कंट्रोल पिल्स दो प्रकार की होती हैं- कॉम्बिनेशन पिल्स जिसमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन होता है और प्रोजेस्टिन-ओनली-पिल्स। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन ये दो ऐसे हार्मोन हैं जो हमारे शरीर में स्वतः बनते हैं और ये गोलियां इन हार्मोन्स का सिथेंटिक रुप प्रदान करती हैं।

अपने डॉक्टर से पूछें कि आपको किस तरह की गोलियां लेनी चाहिए। यदि गोलियों में एस्ट्रोजन की मात्रा अधिक है तो आपका वजन बढ़ सकता है। अगर आपको लगता है कि आपका वजन बढ़ गया है तो अपने डॉक्टर से परामर्श लें और गोलियां बदलने के लिए पूछें।

इसी तरह इंट्रा यूटेरिन डिवाइस या आईयूडी- मिरेना आदि में हार्मोन्स होते हैं जिससे कुछ महिलाओं में सूजन और वाटर रिटेंशन की समस्या हो सकती है। लेकिन अधिकांश शोध यह बताते हैं कि इनसे वजन नहीं बढ़ता है। वजन बढ़ने या कोई अन्य साइड इफेक्ट होने पर अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

अगर प्रोजेस्टेरोन-ओनली मेथड (डेपो-प्रोवेरा) की बात करें तो, कुछ शोध के अनुसार इससे हल्का वजन बढ़ सकता है।

मिथक – दो कंडोम का इस्तेमाल करना एक कंडोम की तुलना में ज़्यादा बेहतर होता है

अगर अनचाही प्रेगनेंसी से बचने की बात करें तो सिर्फ़ एक कंडोम ही काफी है। एक ही समय दो कंडोम का इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं है क्योंकि ऐसा करने से यह फट सकता है।

इसलिए यदि आपको प्रेगनेंसी की चिंता हो रही है तो एक कंडोम के साथ गर्भनिरोधक (पिल्स, आईयूडी) के अन्य तरीकों का इस्तेमाल करें।

मिथक – स्तनपान के दौर में गर्भधारण नहीं होता, यह भी एक गर्भनिरोधक की तरह काम करता है।

जब एक महिला अपने नवजात शिशु को हर चार घंटे में स्तनपान कराती है और बच्चे को जूस, पानी या कोई अन्य आहार नहीं देती है तो इस दौरान उसके शरीर में ओव्यूलेशन रुक जाता है। इसलिए ब्रेस्टफीडिंग के दौरान प्रेगनेंसी से बचने में मदद मिलती है और इस विधि को लैक्टेशन एमेनोरिया मेथड (एलएएम) कहा जाता है।

हालांकि एलएएम (LAM) बच्चे के जन्म के बाद शुरूआती छह महीनों के लिए ही गर्भनिरोध के रुप में अच्छा माना जाता है लेकिन सिर्फ़ तब, जब सभी नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए (यानी ख़ासतौर पर बच्चा पूरी तरह स्तनपान पर निर्भर हो)। हालांकि यह तरीका बहुत विश्वसनीय और भरोसेमंद नहीं है। स्तनपान कराने के दौरान भी बहुत सी महिलाओं को अनचाही प्रेगनेंसी हो जाती है।

मिथक – कंडोम मूड खराब कर देता है, कोई सेंसेशन भी नहीं होता

कंडोम का उपयोग करते समय यदि सेंसेशन या स्किन से स्किन का स्पर्श महसूस नहीं हो रहा तो आप सही कंडोम का उपयोग नहीं कर रहे हैं। मार्केट में कई तरह के कंडोम उपलब्ध हैं जो बहुत पतले हैं और वे प्रेगनेंसी रोकने में उतने ही प्रभावी हैं जितने अन्य मोटे कंडोम।

साथ ही कंडोम का इस्तेमाल करने से मूड नहीं खराब होता है। इसलिए क्रिएटिव बनें। आप फोरप्ले के दौरान भी कंडोम पहन सकते हैं। कंडोम विभिन्न आकार, रंग, बनावट और फ्लेवर में मौजूद है। आपको अलग-अलग मूड के लिए नए फ्लेवर ट्राई करना चाहिए।

रात में सुपर थिन कंडोम और सुबह के लिए रिब्ड डॉटेड कंडोम के बारे में क्या ख्याल है? यह मजा किरकिरा करने के बजाय मूड बना देता है।

सिर्फ़ यही नहीं दरअसल कंडोम सेक्स को बेहतर भी बनाता है क्योंकि आपको प्रेगनेंट होने की चिंता नहीं रहती और ना ही यौन संचारित रोगों की।

मिथक – गोलियां महिला की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं

हार्मोनल बर्थ कंट्रोल जैसे पिल्स, हार्मोनल आईयूडी या इंजेक्शन के बारे में एक आम मिथक यह है कि लंबे समय तक इनका इस्तेमाल करने से महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है। यह पूरी तरह गलत है।

हार्मोनल बर्थ कंट्रोल जैसे पिल्स, हार्मोनल आईयूडी या इंजेक्शन के बारे में एक आम मिथक यह है कि लंबे समय तक इनका इस्तेमाल करने से महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है। यह पूरी तरह गलत है।

गर्भनिरोधक गोलियां चाहे आप कुछ महीनों तक सेवन करें या कुछ सालों तक, इन्हें बंद करने के बाद ही प्रेगनेंसी की संभावना बनती है। कुछ मामलों में फर्टिलिटी वापस आने में समय लगता है लेकिन यदि गर्भधारण में आपको कोई अन्य समस्या आ रही है तो अपने डॉक्टर से सलाह लें।

गर्भनिरोधक गोलियां चाहे आप कुछ महीनों तक सेवन करें या कुछ सालों तक, इन्हें बंद करने के बाद ही प्रेगनेंसी की संभावना बनती है। कुछ मामलों में फर्टिलिटी वापस आने में समय लगता है लेकिन यदि गर्भधारण में आपको कोई अन्य समस्या आ रही है तो अपने डॉक्टर से सलाह लें।

मिथक – हर बार सेक्स के बाद आई-पिल का इस्तेमाल किया जा सकता है

जैसा कि नाम से पता चलता है, इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (ईसीपी) जैसे आई-पिल, अनवांटेड -72 आदि सिर्फ़ इमरजेंसी के समय में इस्तेमाल की जाती हैं, जैसे कि जब आप अगर सेक्स के दौरान आप कंडोम भूल गए या कंडोम फट गया।

सेक्स के बाद ये गोली ले लाना तो बहुत आसान है …लेकिन मायने ये रखता है कि जब आप गर्भनिरोधक दवाइयों की जगह पर बार-बार इसका इस्तेमाल करने लगती हैं तो यह आपके शरीर पर कितना हानिकारक प्रभाव डालता है। 

इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स में हार्मोन की मात्रा नियमित इस्तेमाल की जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियों की तुलना में अधिक होती है।

मिथक – सेक्स के बाद पेशाब करना गर्भनिरोधक का काम करता है

बहुत से लोगों का मानना है कि सेक्स के बाद पेशाब करने से स्पर्म बाहर निकल जाता है और प्रेगनेंसी नहीं होती है। लेकिन यह सिर्फ़ एक मिथक है। प्रेगनेंसी के लिए, सिर्फ़ एक ही स्पर्म का योनि से होते हुए अंडे के संपर्क में आना काफ़ी है।

यहां तक कि सेक्स के बाद आपने पेशाब किया हो और स्खलन भी योनि से बाहर किया गया हो फिर भी इस बात की गुंजाइश है कि स्पर्म योनि से होते हुए अंडे से मिल सकता है। इसलिए यह जान लें कि प्रेगनेंसी से बचने का एकमात्र तरीका प्रभावी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना ही है।

मिथक – मैं प्री-कम / प्री इजेकुलेट से प्रेगनेंट नहीं हो सकती

प्री-इजेकुलेट को प्री-कम भी कहा जाता है, जो एक तरह का तरल पदार्थ (फ्लुइड) है और पुरुष के लिंग से तब निकलता है जब वे यौन रुप से उत्तेजित होते हैं। इस फ्लूइड में भी कुछ स्पर्म मौजूद हो सकते हैं। इसलिए प्रेगनेंसी से बचने के लिए पेनिट्रेटिव या पेनो-वेजाइनल सेक्स से पहले हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए।

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