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जब भी हम एसटीआई/ एसटीडी यानी किसी यौनिक संक्रमण की बात करते हैं, यहाँ यह ध्यान रखना ज़रूरी हो जाता है कि ये वे संक्रमण होते हैं जो आमतौर पर असुरक्षित सेक्स (यौनिक/ गुदा(एनल)/ मौखिक (ओरल) के ज़रिये हम तक पहुँचते हैं।  जब भी हम असुरक्षित सेक्स की बात करते हैं, उसका सीधा अर्थ होता है बिना कंडोम के सेक्स।

नाम में क्या रखा है – एसटीडी या एस टी आई में फर्क क्या है?

यह सवाल बहुत ही लाज़िम है, बहुत सारे लोग यह समझने में असमर्थ होते हैं कि एस टी आई (यौनिक संक्रमण) और यौनिक रोग (एस टी डी) में क्या अंतर है? एसटीआई अथवा यौनिक संक्रमण असुरक्षित सेक्स करने के बाद बैक्टेरिया, वायरस अथवा किसी अन्य परजीवी के माध्यम से होने वाले संक्रमण को कहते हैं।  

अगर इसे संक्रमण की वजह से किसी बीमारी के लक्ष्ण नज़र आने लगें, मसलन योनी अथवा लिंग से अचानक ही किसी द्रव का स्त्राव (डिस्चार्ज) होने लगे या फिर यौनिक अंगों पर फफोले या छालेनज़र आने लगें तो बहुत संभव है कि आपका संक्रमण यौनिक रोग में बदल गया है। 

आम सहज भाषा में बात कही जाए तो एसटीआई और एसटीडी के बीच इकलौता फ़र्क यह है कि यौनिक रोग यानि एस टी डी में आपको संक्रमण के लक्षण नजर आने लगते हैं।  

यौनिक रोग एवं उनके प्रकार 

जीवाणु (bacteria) जनित यौन रोग – क्लैमेडिया, सिफ़िलिस,  गोनोरिया (सूजाक) 

विषाणु (virus)  जनित यौन रोग – जननांग पर दाने/मस्से (जेनिटल वार्ट्स /एच पी वी), जेनिटल हर्पीज़, पानीदार दाने, हेपेटाइटिस बी, एच आई वी (इसकी वजह से एड्स होता है)  

परजीवी (parasite) जनित यौन रोग : ट्राइकोमोनिएसिस (ट्रिक), प्युबिक लाइस (जूँ), स्कैबीज़ 

अन्य संक्रमण जिसकी वजह से एस टी डी हो सकता है : बैक्टीरियल वेजिनोसिस, कैंडिडा (यीस्ट इन्फेक्शन) 

कुछ एस टी आई संक्रमण तो इतने अजीबोग़रीब होते हैं कि आपको कोई भी लक्षण नज़र नहीं आएगा मगर संक्रमण हो चुका होगा।   लेकिन अगर आपको कोई भी संक्रमण हो तो ज़रूरी है कि जल्द से जल्द किसी डॉक्टर से मिलें।

यौनिक रोगों के लक्षण

स्त्रियों में नज़र आने वाले लक्षण – अगर आप स्त्री हैं और आपको निन्मलिखित में से कोई भी लक्षण अचानक नज़र आने लगे तो जल्द ही डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय कर लीजिये।  

– पेशाब करते हुए योनी में दर्द होना 

– सेक्स करते हुए योनी में दर्द होना 

– मासिक चक्र में दर्द होना भी इसका एक महत्वपूर्ण लक्ष्ण है 

– योनी से होने वाला हलके या गहरे पीले / हरे अथवा खून के रंग के स्त्राव को भी इन लक्षणों में से एक माना  गया है।  

पुरुषों में नज़र आने वाले लक्षण – आप पुरुष हैं और आपको निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण अचानक नज़र आने लगे तो  जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलने का वक़्त तय कर लीजिये। 

– पेशाब करते हुए लिंग में दर्द होना 

– सेक्स करते हुए लिंग में दर्द होना 

– लिंग अथवा गुदा से अजीब स्त्राव 

– एक अथवा दोनों अन्डकोशों में दर्द 

– लिंग अथवा गुदा छिद्र में छाले, फ़फोले 

 चीज़ें जो भूल से भी नज़रअंदाज़ न करें

अगर आपको थोड़ा भी लगता है कि आप किसी भी प्रकार के यौन संक्रमण से गुज़र रहे हैं अथवा किसी यौन रोग का शिकार हो गये हैं तो इसे बिलकुल भी नज़रअंदाज़ मत कीजिये।  डॉक्टर के साथ तुरंत एक अपॉइंटमेंट लीजिए और इसका निदान ढूँढिये। 

यहाँ यह जानना बहुत ज़रूरी है कि अधिकाँश यौन रोगों का इलाज़ बहुत आसानी से हो जाता है लेकिन अगर इस पर नहीं दिया गया तो कुछ यौन रोग न केवल बाँझपन लेकर आते हैं बल्कि एच आई वी सरीखे  कुछ रोग तो जान भी ले सकते हैं।

मुख्य एसटीआई/ एसटीडी

एच आई वी  

ह्यूमन इम्यूनोडेफिसिएन्सी वायरस जिसे अक्सर एच आई वी कहा जाता है, एड्स का मुख्य कारण होता है।   एच आई की संक्रमण की कई वजहें हो सकती हैं, सिमें सबसे आम वजह संक्रमित शारीरिक दवाव के संपर्क में आना है, जैसे वीर्यपात से पहले लिंग से होने वाले स्राव, वीर्य, योनि से होने वाले स्राव, मां का दूध एवं संक्रमित खून के संपर्क में आने से एचआईवी होने की संभावना बढ़ जाती है।  

यहाँ इस बात के बारे में जानना भी आवश्यक है कि एच आई वी संक्रमण, यौनिक एवं गैर-गौनिक दोनों तरीके से हो सकता है। 

यौनिक गतिविधियों में मुख्यतया सुरक्षित मुख, योनि और गुदा मैथुन को रखा जाता है जबकि गैर यौनिक गतिविधियों में संक्रमित सिरिंज या सुई का इस्तेमाल, दूषित रक्त चढ़ाने से हुआ संक्रमण और  नवजात शिशुओं का एचआईवी पॉजि़टिव महिला से स्तनपान करना शामिल है। 

साथ ही साथ गोनोरिया, क्लैमिडिया, सिफि़लिस, जेनिटल हर्पीज़, ट्राइकोमोनिएसिस, बैक्टीरियल वेजिनोसिस जैसी बीमारियों का पूर्व इतिहास भी एच आई वी होने के ख़तरे को बढ़ा देता है। 

बचाव – 

1।  पुरुष हों या महिला हमेशा कंडोम का प्रयोग करें।  

2।  यौन संबंध एक साथी या कम साथियों से बनाएं  यानी मल्टीपल पार्टनर्स की इच्छा का त्याग करें।  

3।  आप पुरुष हैं तो खतना के विषय में विचार कर सकते हैं, माना जाता है कि पुरुषों द्वारा अस्पताल या क्लीनिक में खतना  करवाने के बाद एच आई वी के केसेज़ में 50 प्रतिशत तक की कमी आई।  

4।  अपने और अपने साथी की  एचआईवी की जांच कराएं।

6।  नए साथी से यौन संबंध बनाने वाले हैं, तो असुरक्षित सेक्स करने से पहले जांच कराएं। लापरवाही ख़तरनाक हो सकती है।  

7।  हमेशा नयी जीवाणुरहित सुइयों का ही प्रयोग करें।

8।  कोशिश हो कि ज़रूरत पड़ने पर भरोसेमंद ब्लड बैंक से लिया गया सुरक्षित खून ही उपयोग में लिया जाये।  

 9।  अगर माँ एच आई वी पॉजिटिव है तो गर्भावस्था और प्रसव के दौरान एंटीरेट्रोवायरल दवाएं लेना न भूलें।

10।  कोशिश हो कि डिलीवरी नॉर्मल रहे।

11।  बच्चे को स्तनपान न करवाएँ।

सिफ़िलिस 

ट्रिपोनीमा पैलीडियम नामक जीवाणु से होने वाले यौन संक्रमण को सिफ़िलिस कहते हैं।  इसे आमतौर पर नकलची यौन रोग भी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षणों को पहचानना तनिक मुश्किल होता है। इलाज़ के अभाव में सिफ़िलिस अंधेपन अथवा मानसिक असंतुलन की ओर भी ले जा सकता है।  

सिफ़िलिस होने की वजह असुरक्षित मुख, योनि या गुदा मैथुन करने से होता है। कभी-कभार किसी संक्रमित व्यक्ति के घाव के संपर्क में आने से भी यह बीमारी हो सकती है।  

सिफ़िलिस के लक्षण में योनी का घाव शामिल होता है।  पुरुषों में यह घाव लिंग, गुदा या मुंह पर दिख सकता है।  

सिफलिस की दूसरी अवस्था में बुखार, पीठ, हथेली, पैर के तलवों पर दाने, गुदा के आस-पास मस्से का निकलना आदि शामिल हैं।  यह धीरे-धीरे लकवा, अंधापन और सर मसल्स की ओर ले जाता है।

बचाव – 

1।   कंडोम का हमेशा इस्तेमाल करें।

2।  न केवल अपनी बल्कि अपने साथी की भी सिफि़लिस के लिए जांच कराएं।

3।   पेशाब करते समय किसी भी तरह का  असामान्य स्राव, घाव या दर्द हो तो सिफि़लिस और दूसरे यौनसंचारित रोगों की जांच कराएं।

बैक्टीरियल वेजिनोसिस

बैक्टीरियल वेजिनोसिस (बी। वी। ) महिलाओं को  होने वाला यौन रोग है। जब योनि के जीवाणुओं का सामान्य संतुलन, ‘हानिकारक’ जीवाणुओं (बैक्टीरिया) के बढ़ने से बिगड़ जाता है, बैक्टीरियल वेजिनोसिस (बी। वी। ) होने की संभावना होती है।  

डूश करने पर, योनी में साबुन का प्रयोग करने पर, बहुत देर तक टेम्पोन अन्दर छोड़ने पर, डायफ्राम जैसे गर्भ निरोधकों का प्रोग करने पर, या फिर मल्टी-पार्टनर सेक्स करने पर बैक्टीरियल वेजिनोसिस होने का ख़तरा रहता है।  

इसका सबसे बेहतर बचाव ऊपर वर्णित की गयी तमाम गतिविधियों से बचना है।

गोनोरिया

निसेरिया गोनोरीए  नामक बैक्टीरिया से होने वाला यौन रोग गोनोरिया कहलाता है । कहा जाता  है कि यह बहुत तेजी से फैलता है और उसी रफ़्तार में यह आपके गले, मूत्र नली, योनि और गुदा को संक्रमित कर सकता है। 

इसके बारे में जो सबसे ख़ास बात है वह यह है कि गोनोरिया का इलाज़ बेहद आसानी से हो सकता है।  

महिलाओं में गोनोरिया के लक्षण – योनि से अधिक स्राव, योनि से पीला या हरा स्राव, तेज़ बदबू, पेशाब करते समय दर्द, सेक्स करते समय दर्द, सेक्स करने के बाद खून आना, गुदा में खुजली, गुदा से खूनी या मवाद जैसा स्राव। 

पुरुषों में यह लिंग स्त्राव, अन्डकोशों में दर्द के रूप में नजर आता है।  गोनोरिया का इलाज नहीं किया गया तो यह बांझपन की ओर ले जा सकता है।   

इसके होने की भी मुख्य वजह असुरक्षित सेक्स सम्बन्ध एवं कई साथियों के साथ सेक्स है।  

कॉन्डोम के इस्तेमाल को गोनोरिया से बचाव के लिए बेहद ज़रूरी माना

हेपिटाइटिस बी

हेपिटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) के संक्रमण के कारण लिवर में होने वाले संक्रामक रोग को हेपेटाइटिस बी कहते हैं।  यह किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित मुख, योनि या गुदा मैथुन करने की वजह से हो सकता है। इसके अन्य कारणों में संक्रमित सूइयों का प्रयोग करना, किसी संक्रमित व्यक्ति के रेज़र या टूथब्रश का इस्तेमाल,  शरीर के अंग में छेद करने, एक्यूपंक्चर करने या गोदने (टैटू बनाने) के लिए जीवाणुरहित किए बिना औजारों का प्रयोग करना, संक्रमित खून चढ़ाया जाना और प्रसव के दौरान संक्रमित माँ से उसके बच्चे का संक्रमण शामिल है।  नशे की सुई लगाना और डायलिसिस भी इसके ख़तरे को बढ़ाता है।  

हेपिटाइटिस-बी का संक्रमण पेट दर्द, गहरे रंग की पेशाब, जोड़ों में दर्द, पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना), त्वचा में  खुजलाहट के रूप में नज़र आ सकता है।  

हेपिटाइटिस-बी का टीका लगवाना इससे बचाव का ज़रूरी उपाय माना जाता है।  जीवाणुरहित सुइयों का प्रयोग भी आवश्यक तरीका है। यौन सम्बन्ध बनाते हुए कॉन्डोम न भूलें। 

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