fbpx

सेक्स के कई रूप होते हैं, कई ढंग भी। इन्हीं में से एक है आउटरकोर्स। अलग-अलग लोगों के लिए इसकी अलग-अलग परिभाषा है।

साधारण भाषा में कहे तो आउटरकोर्स में योनी में लिंग के प्रवेश के अतिरिक्त सभी क्रियाएं आती है ।

आइये जानते हैं इस क्रिया के बारे में और इसमें बरतने वाली ज़रूरी सावधानियों के बारें में: 

चूमना – पार्टनर के शरीर के भिन्न हिस्सों को चूमना भी आउटरकोर्स माना जाता है।

हस्तमैथुन – पार्टनर साथ हो या न हो, आप सेक्स की इस क्रिया को अंजाम दे सकते हैं। अपने यौन अंगों को खुद छूना, सहलाना और उससे आनंद पाना आउटरकोर्स की क्रिया का हिस्सा होता है। यह काम आप पार्टनर के साथ भी कर सकते हैं। पार्टनर के यौन अंगों को छू कर उन्हें सेक्स वाले आनंद की अनुभूति करवा सकते हैं।

सहलाना – पार्टनर शरीर के विभिन्न अंगों को बार-बार कुछ यूँ छूना/सहलाना कि पार्टनर को उस क्रिया में अच्छा लगे – यह क्रिया  आउटरकोर्स के रूप में सबसे अधिक प्रचलित है।

सेक्स टॉयज का इस्तेमाल – आउटरकोर्स को आउटरकोर्स अधिकतर इसलिए कहा जाता है कि इसमें लिंग प्रवेश नहीं होता है लेकिन आनंद में कमी न हो इस ख़ातिर बहुत से लोग सेक्स टॉयज का इस्तेमाल करते हैं। यह न केवल पूरी प्रक्रिया को और भी आनंददायक बनाता है, बल्कि सुरक्षित सेक्स की मानकता पर खरा उतरता है।

ओरल सेक्स (मुख मैथुन) पार्टनर के यौन अंगों को चूम कर, जीभ से सहला कर भी पार्टनर को ओर्गाज्म दिलवाया जा सकता है। ओरल सेक्स को चरम सुख (ओर्गाज्म) के लिए बहुत ही कारगर माना जाता है लेकिन सेक्स की इकस प्रक्रिया के दौरान इस बात का ध्यान रखना बहुत ही ज़रूरी है कि डेंटल डैम अथवा कॉन्डम का इस्तेमाल किसी भी प्रकार से न भूलें।

एनल सेक्स (गुदा मैथुन ) –  जिनके लिए आउटरकोर्स का अर्थ योनी में लिंग के प्रवेश के आलावा बाक़ी सभी क्रियाएँ हैं, वे एनल सेक्स को आउटरकोर्स में ही शामिल मानते हैं। गुदा मैथुन सदियों से किया जा रहा है, एवं यह विषम लिंगी और समलिंगी, दोनों ही प्रकार के संबधों में समान ढंग से किया जाता है। गुदा मैथुन के लिए बहुत जरूरी है कि सफाई का उचित ध्यान रखा जाए, साथ ही साथ इस प्रक्रिया में कॉन्डम और ल्यूब का इस्तेमाल करना न भूलें। ल्यूब गुदा द्वार में चिकनाई भी बनाता हैं जिससे लिंग को प्रवेश करने में आसानी होती। योनी में यह चिकनाई स्वाभाविक तौर पर होती है। अक्सर लोग एनल सेक्स को दर्द से जोड़ते हैं जबकि दर्द अधिकतर मानसिक तनाव की वजह से होता है। अगर दोनों ही पार्टनर की सहमति के साथ शांत दिमाग से किया जाए तो दर्द का अहसास शायद न हो।

आउटरकोर्स का सबसे बड़ा पक्ष यह है कि इससे गर्भ का भय नहीं रहता है, लेकिन अगर ओरल और एनल सेक्स में कॉन्डम/ डेंटल डैम  का इस्तेमाल न हो तो यौन रोगों से सुरक्षा संभव नहीं है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आउटरकोर्स के दौरान भी कॉन्डम/ डेंटल डैम के इस्तेमाल में कमी न हो।  

healthguru
Author

Write A Comment