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सेक्स करना ज़िंदगी का एक ख़ूबसूरत एहसास है लेकिन यह भी सच है कि उसी सेक्स से प्रेगनेंसी भी हो सकती है। एक इकलौते स्पर्म से भी प्रेगनेंसी हो सकती है। उत्तेजना के उन पलों में कंडोम का ख्याल न आना आम बात है। लेकिन इतना जान लीजिए कि महज एक बार ही गर्भनिरोधक भूलने से प्रेगनेंसी हो सकती हैं।

प्रेगनेंसी से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका क्या है? बाद में पछताने से बेहतर है कि आप शुरूआत से ही बचाव के तरीके अपनाएं। सुरक्षित सेक्स करने की आदत डालें और अपनी पसंद का गर्भ निरोध इस्तेमाल करें।

अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए महिलाओं और पुरुषों दोनों के पास ही बहुत से ऑप्शन मौजूद हैं। लेकिन ऐसे कई फैक्टर हैं जो आपको अपनी पसंद का गर्भनिरोधक चुनने में बाधा बन सकते हैं जैसे- आपकी उम्र, गर्भनिरोधक की कीमत, आपके आसपास गर्भनिरोधक की आसानी से उपलब्धता, पार्टनर की पसंद/नापसंद , साइड इफेक्ट, गर्भनिरोधक का दोबारा इस्तेमाल या टिकाऊ होना और यह आपकी लाइफस्टाइल में कितना फिट बैठता है आदि।

अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए महिला या पुरुष, जवान या बूढ़े हर किसी को अपनी पसंद का गर्भनिरोधक चुनने का अधिकार है। अपने आसपास के लोगों से एकदम अलग गर्भनिरोधक का उपयोग करना भी पूरी तरह से सही है। ऐसा कोई भी गर्भनिरोधक नहीं है जो सबके लिए एक समान उपयुक्त हो लेकिन आप अपने लिए सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित बर्थ कंट्रोल मैथड चुन सकते हैं।

बर्थ कंट्रोल के तरीके सभी के लिए : –

1- परहेज – प्रेगनेंसी से बचने का एक तरीका यह भी है कि आप सेक्स ही ना करें या कम से कम वजाइनल सेक्स ना करें। इसकी बजाय आप ओरल या एनल सेक्स कर सकते हैं।

 2- आउटरकोर्स: अलग अलग लोगों के लिए इसके मायने अलग हैं। इसे आप गैर यौनिक संभोग भी कह सकते हैं यानी कि इस तरीके में आप बिना पेनिट्रेशन वाले सेक्स को एंजॉय करते हैं जैसे कि ओरल सेक्स।

पुरुषों के लिए गर्भनिरोध के विकल्प 

1- कंडोम – कंडोम रबर का एक खोल होता है जो पेनिस को पूरी तरह कवर कर लेता है और स्पर्म को योनि (वजाइना) में जाने से रोकता है। यह छोटा सा ट्यूब जैसा बैग है जिसका बंद सिरा निप्पल के आकार जैसा होता है। स्खलन के बाद इसी निप्पल वाले हिस्से में स्पर्म जमा होता है। कंडोम अलग-अलग साइज, स्टाइल और शेप में उपलब्ध है। कंडोम लैटेक्स, पॉलीयूरेथेन या लैम्बस्किन से बने हो सकते हैं। ये ल्यूब्रिकेटेड और अनल्यूब्रिकेटेड दोनों तरह के होते हैं। 

कंडोम की कीमत भी कम होती है और किसी भी मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाते हैं। खास बात यह है कि कंडोम आपको यौन संचारित बीमारियों (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन) से भी बचाते हैं। अपनी सेक्स लाइफ को मजेदार बनाने के लिए अलग-अलग फ्लेवर और वैरिएशन जैसे अल्ट्रा थिन, चॉकलेट, स्ट्रॉबेरी कंडोम ट्राई करें।

2- पुल आउट / विड्रॉल मैथड – इस विधि में सेक्स के दौरान जब पुरूष स्खलित (Ejaculate) होने वाला होता है तो वो अपने लिंग को योनि से बाहर खींच लेता है जिससे योनि के अंदर स्पर्म ना जाए। हालांकि स्पर्म को योनि में जाने से रोकने का यह एक सुरक्षित तरीका नहीं है क्योंकि प्री कम/प्री इजैकुलेट के जरिए भी कुछ स्पर्म योनि के अंदर जा सकते हैं।

3- पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक दवाइयां : अभी इन दवाओं पर रिसर्च जारी हैं और हाल के परिणामों से यह साबित होता है कि ये पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि इसे बाज़ार में आने में शायद अभी कुछ और साल लगेंगे।

4- नसबंदी – यह एक सर्जिकल प्रोसीजर है जिसमें पुरुषो के जननांग के अंदर वास डेफरेन्स नाम की एक ट्यूब को काट दिया जाता है या ब्लॉक कर दिया जाता है जिससे स्पर्म वीर्य (सीमेन) में नहीं मिल पाता है। यह गर्भनिरोध का एक स्थायी तरीका है। यदि आप भविष्य में बच्चे नहीं चाहते तो बेशक आप नसबंदी करा सकते हैं।

महिलाओं के लिए गर्भनिरोध के विकल्प 

हार्मोनल मैथड

इस विधि में पिल्स या दवाएं दी जाती हैं जो शरीर में जाकर प्रेगनेंसी रोकने में मदद करती हैं।

1- गर्भनिरोधक दवाइयां : प्रेगनेंसी से बचने के लिए महिलाओं को रोजाना गर्भनिरोधक दवा का सेवन करना पड़ता है। गर्भनिरोधक दवाइयां, दो हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन से संयुक्त रुप से बनी होती हैं। ‘मिनी पिल्स’ या ‘प्रोजेस्टिन ओनली पिल्स’ में सिर्फ़ प्रोजेस्टिन होता है। ‘सहेली’ एक बिना हार्मोन वाली दवा है जिसे गर्भनिरोधक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

2- हार्मोनल आईयूडी- यह माचिस की तीली जितना लंबा छोटा सिलेंडर जैसा होता है जिसे महिला के गर्भाशय या बच्चेदानी के अंदर डॉक्टर द्वारा फिट किया जाता है। यह डिवाइस महिला के शरीर में पांच सालों तक रह सकती है। इससे धीरे-धीरे बहुत ही कम मात्रा में प्रोजेस्टोजेन हार्मोन (लेवोनोर्गेस्ट्रेल) निकलता रहता है।

3- डेपो-प्रोवेरा – डेपो प्रोवेरा कंट्रासेप्टिव इंजेक्शन का एक प्रचलित ब्रांड है जिसमें प्रोजेस्टिन हार्मोन होता है। यह इंजेक्शन हर तीसरे महीने दिया जाता है। इसमें मेड्रोक्सी प्रोजेस्टेरोन एसिटेड मौजूद होता है जो ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को रोकता है. इसके कारण ओवरी से अंडे रिलीज नहीं होते हैं। 

इसके अलावा यह सर्वाइकल म्यूकस को गाढ़ा कर देता है जिसके कारण स्पर्म अंडों तक नहीं पहुंच पाते हैं। यदि आप रोज गर्भनिरोधक दवाइयां नहीं लेना चाहती हैं तो डेपो प्रोवेरा आपके लिए सबसे बेहतर उपाय है। हालांकि इससे कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।

नॉन- हार्मोनल मैथड

1- इंट्रायूटेरिन डिवाइस – इंट्रायूटेरिन डिवाइस (आईयूडी) एक छोटी कंट्रासेप्टिक डिवाइस है जिसे गर्भाशय में डाला जाता है। यह डिवाइस लंबे समय तक काम करती है और मार्केट में बिकने वाली सबसे प्रभावी रिवर्सिबल बर्थ कंट्रोल मानी जाती है। आईयूडी दो तरह के होते हैं- कॉपर आईयूडी और हार्मोनल आईयूडी। कई हार्मोनल आईयूडी जैसे कि मिरेना, केलीना आदि और नॉन हार्मोनल आईयूडी जैसे कि कॉपर टी,  5 से 10 सालों तक काम करती हैं।

2- कॉपर-टी आईयूडी- यह एक नॉन हार्मोनल बर्थ कंट्रोल डिवाइस है जिसे महिला के गर्भाशय में फिट किया जाता है। बाज़ार में यह मल्टीलोड नाम से बिकती है। यह टी-शेप का प्लास्टिक का एक टुकड़ा होता है जो कॉपर वायर की क्वायल से लिपटा होता है। कॉपर टी आईयूडी कंट्रासेप्शन का रिवर्सिबल रुप है। इसे आप कभी भी बाहर निकलवा सकती हैं और उसके बाद गर्भवती हो सकती हैं। आईयूडी में लगा कॉपर, नैचुरल स्पर्मिसाइड की तरह काम करता है और वजाइना में आने वाले स्पर्म को नष्ट कर देता है। इस तरह अंडा फैलोपियन ट्यूब में फर्टिलाइज नहीं हो पाता है और आप प्रेगनेंट नहीं हो पाती हैं।

3- फीमेल कंडोम – बाज़ार में अब फीमेल कंडोम भी उपलब्ध हैं जिसे सेक्स के दौरान उपयोग करके प्रेगनेंसी से बचा जा सकता है। फीमेल कंडोम को महिलाएं सेक्स से पहले अपनी योनि के अंदर लगाती हैं। फीमेल कंडोम के सिरे का शेप रिंग जैसा होता है जो सेक्स के दौरान स्पर्म को योनि के अंदर जाने से रोकता है।

4- ओव्यूलेशन चक्र की निगरानी : महिलाएं ओव्यूलेशन के समय सबसे अधिक फर्टाइल होती है अर्थात अगला पीरियड शुरू होने से 12 से 14 दिन पहले ओवरी से अंडे निकलते हैं और यही वो समय है जब गर्भधारण की संभावना सबसे ज़्यादा रहती है। यदि आप प्रेगनेंसी से बचना चाहती हैं तो आपको इस पूरे अवधि (पूरे फर्टाइल विंडो) के दौरान असुरक्षित यौन संबंध नहीं बनाना चाहिए। मगर ये कोई रामबाण तरीका नहीं हैं। ओवुलेशन पीरियड के बाहर भी महिलाये प्रेग्नेंट हो सकती हैं। 

5- महिला नसबंदी या ट्यूबल लिगेशन: ट्यूबल लिगेशन का सामान्य अर्थ है “ट्यूब को बांधना”। ये ट्यूब फैलोपियन ट्यूब हैं, जो हर महीने ओव्यूलेशन के दौरान एग रिलीज करते हैं और यह अंडा फैलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय में पहुंचता है। यह प्रेगनेंसी को रोकने का इरिवर्सिबल और सर्जिकल तरीका है। इसे ‘महिला नसबंदी’ भी कहा जाता है। अगर आप भविष्य में बच्चे पैदा करना नहीं चाहती हैं तो यह ऑप्शन चुन सकती हैं।

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