fbpx

निमोनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें फेफड़ों में इंफेक्शन होता है। निमोनिया से प्रभावित बच्चे में बुखार, खांसी (कफ के साथ) और सांस लेने में कठिनाई के लक्षण होते हैं । इस लेख के माध्यम से हम समझेंगे कि बच्चों में निमोनिया होने पर समय पर मदद लेना क्यों महत्वपूर्ण है।

बच्चों में निमोनिया के बारे में अधिक जानने के लिए आप इस लेख से भी जानकारी ले सकते हैं <पिछले लेख को हाइपरलिंक करें > जहां हमने विस्तार से निमोनिया क्या है, बच्चों में निमोनिया के कारण क्या हैं ,साथ ही साथ बच्चों में निमोनिया के लक्षण और संकेतों की चर्चा की है ।

इस लेख में हम यह जानेंगे कि बच्चों में निमोनिया का इलाज समय पर करवाना और मेडिकल मदद लेना क्यों महत्वपूर्ण है।

जैसा कि पहले बताया गया है कि निमोनिया फेफड़ों में इंफेक्शन का एक परिणाम है। हमने देखा है कि बहुत से मामलों में माता-पिता घरेलू उपचार की मदद से अपने बच्चे के निमोनिया के लक्षणों को मैनेज करने की कोशिश करते हैं। माता-पिता और देखभाल करने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि बच्चों में निमोनिया एक ऐसी स्थिति नहीं है जिसे घर पर मैनेज किया जा सकता है। 

यदि आपके बच्चे में बताये गये लक्षण और साथ ही निमोनिया के अन्य चेतावनी के संकेत हैं तो तुरंत अपने बाल रोग विशेषज्ञ या हेल्थ केयर प्रोवाइडर को रिपोर्ट करना अत्यंत ज़रूरी है।

आपका बाल रोग विशेषज्ञ पहले कुछ परीक्षणों या मेडिकल टेस्ट्स की मदद से निमोनिया की पुष्टि करेगा और फिर आपके बच्चे के लिए आवश्यक कुछ दवाएं लिखेगा ।

इन दवाओं में एंटीबायोटिक्स, एंटीपीयरेटिक्स (बुखार को नियंत्रित करने की दवाएं), खांसी को कम करने की दवाएं आदि शामिल होंगी।

आपके बच्चे की स्थिति का आकलन करने के बाद, आपका बाल रोग विशेषज्ञ यह भी तय करने में सक्षम होगा कि आपके बच्चे को अस्पताल में एडमिट करने की आवश्यकता है या  घर पर देखभाल के साथ निमोनिया को मैनेज किया जा सकता है।

यदि बच्चे को सांस लेने में कठिनाई के कारण ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है या लगातार हाई ग्रेड बुखार हो तो ऐसे में बच्चे को अस्पताल में एडमिट कराना आवश्यक हो जाता है।

आपके बच्चे के लिए ये दवाएं लेना क्यों महत्वपूर्ण है?

उपर्युक्त दवाएं न केवल निमोनिया के लक्षणों को नियंत्रित करने और आपके बच्चे को राहत प्रदान करने में मदद करेंगी बल्कि जटिलताओं को भी रोकेंगी।

अगर सही समय में निमोनिया को मैनेज नहीं किया जाता है तो कम उम्र के बच्चों (पांच साल से कम उम्र) को निमोनिया से जुड़ी जटिलताओं का खतरा अधिक होता है ।

बच्चों में इन जटिलताओं के विकसित होने का खतरा होता है:

सांस लेने में तकलीफ होना

शरीर के अन्य अंगों में इंफेक्शन फैलना (सेप्टीसीमिया)

हाई ग्रेड बुखार के परिणामस्वरूप फिट्स (दौरे पड़ना)

समय से इलाज न कराने वाले बच्चों में निमोनिया के निम्न गंभीर परिणाम हो सकते हैं :

फेफड़े में घाव (पस या मवाद बनना)

फेफड़ों में तरल पदार्थ का भरना 

ये सभी जटिलताएं न केवल बच्चों में उपचार की अवधि को लम्बा खींचती हैं बल्कि गंभीर मामलों में जीवन के लिए खतरा भी बन सकती हैं।

यह समझना महत्वपूर्ण है कि बच्चों में निमोनिया के लक्षणों को समय पर नियंत्रित करना आपको बाद में बहुत सी परेशानियों से बचा सकता है। इसलिए यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे में  निमोनिया (खांसी, बुखार, सांस की तकलीफ) के लक्षण हैं तो कृपया अपने बाल रोग विशेषज्ञ या स्वास्थ्य देखभाल प्रोवाइडर से तुरंत मदद लें और आपके बाल रोग विशेषज्ञ ने जो भी सुझाव दिये हैं उनका पालन करें। याद रखें कि निमोनिया एक ऐसी बीमारी है जिसे उचित उपचार और मेडिकल सुपरविज़न की आवश्यकता होती है ,इसे घरेलू उपचार या घरेलू देखभाल की मदद से मैनेज नहीं किया जा सकता है।

निमोनिया के केस में डॉक्टर द्वारा बताई गयी दवाओं के कोर्स को पूरा करें बिना डॉक्टर की सलाह के बीच में दवाइयों को रोकना निमोनिया के लक्षणों की वापसी का कारण बन सकता है।ऐसा करने से  आपके बच्चे को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

Write A Comment