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 डायरिया या लूज़ मोशन एक ऐसी समस्या है जो हर बच्चा अपने जीवन के किसी न किसी समय पर अवश्य अनुभव करता है. यह एक या दो दिन तक हो सकता है, कुछ मामलों में यह दो दिनों से ज्यादा भी हो सकता है. जितने ज्यादा लंबे समय तकआपका बच्चा लूज़ मोशन या डायरिया से पीड़ित होता है, उतनी ही अधिक जटिलताओं की संभावना बढ़ जाती है.

एक हेल्दी बच्चे में, लूज़ मोशन के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं :

  •   वायरल इन्फेक्शन सबसे आम कारण है  (जिसे आमतौर पर स्टमक बग  कहा जाता है) 
  •  बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी एक कारण हो सकता है , हालांकि तुलनात्मक रूप में यह एक कम सामान्य कारण है.
  • फ़ूड एलर्जी और किसी फ़ूड को लेकर सेंसिटिवीटी
  • पेट के कीड़े
  • कोई मेडिकल कन्डीशन (सबसे कम सामान्य)

डायरिया की अवधि के आधार पर, इसे निम्न भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है :

  • शॉर्टटर्म या एक्यूट डायरिया– यह एक या दो दिन तक रहता है और फिर रुक जाता है. डायरिया का यह प्रकार आमतौर पर वायरल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण होता है जो बच्चों में  दूषित भोजन या पानी के सेवन से होता है.
  • लॉन्ग टर्म या क्रोनिक डायरिया – डायरिया का यह प्रकार कुछ हफ़्ते तक रहता है और इसके दोबारा होने की संभावना हो सकती है. यह ज्यादातर पेट के कीड़े  के कारण या मेडिकल स्थिति जैसे पेट ख़राब होना या किसी फ़ूड को लेकर सेंसिटिवीटी आदि के कारण होता है.

बच्चों में डायरिया के सामान्य लक्षण :

कुछ मामलों में लूज मोशन, बुखार, पेट में दर्द, जी घबराना और उल्टी भी हो सकती है. प्रत्येक बच्चे में रोग की गम्भीरता, लूज़ मोशन के होने की प्रवृति के संदर्भ में अलग हो सकती है.

आखिर समस्या क्या है?

पेरेंट्स को बच्चों में डायरिया को गंभीरता से लेने के लिए क्यों कहा जाता है?

इससे पहले कि हम इसे जानें , यहां कुछ प्रमुख तथ्य हैं –

• पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण डायरिया रोग है.

• पांच साल से कम उम्र के बच्चों में यह कुपोषण का प्रमुख कारण है.

बड़ों की तुलना में डायरिया में बच्चों में डीहाइड्रेशन के तेज़ी से होने का खतरा अधिक होता है. यहां तक ​​कि बच्चों में मोडरेट डीहाइड्रेशन का मामला भी हृदय और फेफड़ों पर तनाव को बढ़ा सकता है और जो जीवन को खतरनाक स्थिति में डाल सकता है.

बच्चों में गंभीर डीहाइड्रेशन दौरे और ब्रेन डैमेज का कारण भी बन सकता है.

डीहाइड्रेशन के निम्न कुछ गम्भीर संकेत हैं जिन्हें आपको ध्यान में रखना चाहिए –

• सूखा और चिपचिपे होंठ 

• गहरे पीले रंग का यूरीन आना  या यूरीन का बिलकुल न होना 

• रोते समय आँसू न आना या कुछ बहुत कम आँसू आना

• सूखी ,ठंडी और पीली त्वचा

• बड़े बच्चों में एनर्जी की कमी पर ध्यान ज़रूरी हो सकता है

  • आप स्किन पिंच टेस्ट करने की भी कोशिश कर सकते हैं- पेट के ऊपर, छाती के सामने, कॉलरबोन के पास या हाथ के पीछे की स्किन को पिंच करके देखें . ऐसे बच्चे में जो डीहाइड्रेशन से पीड़ित है- स्किन को चिकोटी काटने या पिंच करने के बाद स्किन झुर्रियों वाली दिखाई देगी और वापस सामान्य होने में कुछ समय लगेगा यानी (स्किन के लचीलेपन में कमी आना) .

क्रोनिक डायरिया के बार बार होने को Malabsorption यानी छोटी आंत से भोजन के अपूर्ण अवशोषण की स्थिति के रूप में जाना जाता है. ऐसा होने से आवश्यक पोषक तत्वों के अवशोषण में कमी से कुपोषण हो सकता है यानी आवश्यक पोषक तत्वों की कमी की स्थिति जो बच्चे को कुछ अन्य जटिलताओं और यहां तक ​​कि बीमारियों को उजागर करती है.

इस लेख का उद्देश्य यह समझना है कि डायरिया एक रोकी जाने वाली स्थिति के साथ-साथ उपचार योग्य स्थिति है. इसलिए यदि आपका बच्चा किसी समय लूज़ मोशन से पीड़ित है, तो आप उसे ओआरएस यानी ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन देना शुरू कर सकते हैं. यहाँ यह याद रखना ज़रूरी है कि 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ओआरएस के साथ ब्रेस्ट फीडिंग कराना जारी रखना चाहिए. भारत सरकार की IMNCI (integrated management of neonatal and childhood illness ) की सिफारिश के अनुसार, इस दौरान आपको अपने बच्चे के आहार में 14 दिनों के लिए ज़िंक सप्लीमेंट ज़रूर देना चाहिए .साथ ही आप यह भी सुनिश्चित करें कि यदि आप उपर्युक्त लक्षणों में से किसी भी डीहाइड्रेशन लक्षण को नोटिस करते हैं , तो तुरंत एक मेडिकल एक्सपर्ट से संपर्क करें. आप एक्सपर्ट से उन उपायों के बारे में भी बात कर सकते हैं जो आप अपने बच्चे को डायरिया से दूर रखने के लिए ले सकते हैं.

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