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 डायरिया यानी दस्त, सर्दी ज़ुकाम की तरह ही बच्चों में होने वाली एक बेहद आम बीमारी है। सभी आयु वर्ग के बच्चे (शिशुओं सहित) अपने जीवन में किसी न किसी समय पर डायरिया या लूज़ मोशन से पीड़ित होते हैं। एक बच्चे को डायरिया हुआ है यह तब माना जाता है, जब उसे एक दिन में कम से कम तीन या अधिक बार लूज़ मोशन होता है। इस तरह अगर बच्चों में डायरिया एक आम बीमारी है, तो हम इसको लेकर इतना घबराते क्यों हैं? विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ-साथ डॉक्टर्स भी बच्चों में डायरिया के शीघ्र रोकने की आवश्यकता पर जोर क्यों देते हैं ?

इसका जवाब बेहद आसान है- भले ही यह एक सामान्य बीमारी है, लेकिन डायरिया से संबंधित जटिलताओं से पीड़ित बच्चों के लिए यह असामान्य नहीं है। वयस्कों की तुलना में बच्चे आसानी से डिहाईड्रेटेड हो जाते हैं और इसलिए डिहाईड्रेशन के कारण उनमें अनेक समस्याएं हो जाती हैं ।

पेरेंट्स और ग्रैंड पेरेंट्स , दोनों की डायरिया को लेकर अपनी अलग-अलग मान्यतायें है । दादा-दादी के पास अक्सर उन खाद्य पदार्थों की एक लंबी सूची होती है जो इस दौरान बच्चों को नहीं खाने चाहिए या खाने चाहिए साथ में उनके कुछ घरेलू नुस्खे भी होते हैं । कुल मिलाकर बच्चों में डायरिया को लेकर अनेक भ्रम हैं ।

यही कारण है कि आज, इस लेख के माध्यम से मैं बच्चों में डायरिया के इलाज से जुड़े सभी आम मिथकों को दूर करने की कोशिश कर रही हूं : 

# 1 मिथक: डायरिया के दौरान माँओं को शिशु को ब्रेस्टफीडिंग करानी बंद कर देनी चाहिए

तथ्य: छह महीने से कम उम्र के शिशुओं को सिर्फ़ ब्रेस्टफीडिंग कराई जानी  चाहिए। डायरिया के  दौरान दूध पिलाना या ब्रेस्टफीडिंग बंद नहीं करनी  चाहिए। इस समय, मां को जल्दी जल्दी और लंबे समय तक ब्रेस्टफीडिंग करानी चाहिए। यदि बच्चा 6 महीने से बड़ा है, तो माँओं को ब्रेस्टफीडिंग कराना जारी रखना चाहिए और निम्नलिखित तरल पदार्थों में से एक या एक से अधिक तरल पदार्थ देना चाहिए – ओआरएस, दही पानी , दूध, नींबू पानी , चावल या दाल का पानी , वेजिटेबल सूप,  नारियल पानी या सादा स्वच्छ पानी।

# 2 मिथक: कुछ लूज़ मोशन से मेरे बच्चे को डिहाईड्रेशन नहीं होगा 

तथ्य: जैसा कि मैंने पहले भी बताया कि, बच्चे वयस्कों की तुलना में अधिक आसानी से डिहाईड्रेटेड होते हैं। इसलिए कुछ लूज़ मोशन से भी बच्चे को डिहाईड्रेशन हो सकता है।

# 3 मिथक: सिर्फ पानी ही डिहाईड्रेशन को रोकने का एकमात्र उपाय है

तथ्य: तरल पदार्थ की कमी को रोकना महत्वपूर्ण है, लेकिन पानी अकेले उन पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं कर सकता है जो डायरिया के दौरान नष्ट हो जाते हैं । इसलिए, डायरिया को रोकने में (ओआरएस) की आदर्श रूप से सिफारिश की जाती है। ओआरएस में सोडियम, पोटेशियम आदि जैसे मिनरल्स होते हैं जो डिहाईड्रेशन से उबरने के लिए आवश्यक हैं।

# 4 मिथक: जब भी मेरे बच्चे को डायरिया होगा उसे हर बार एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता होगी 

तथ्य: सबसे पहले, यह समझना महत्वपूर्ण है, कि डायरिया इंफेक्शन का लक्षण है न कि उपचार । हालांकि, स्वस्थ बच्चों में भी 95% बार वायरल इंफेक्शन का  कारण लूज़ मोशन होते हैं। इसके अलावा बच्चों में साल्मोनेला इंफेक्शन भी लूज़ मोशन का एक आम और दूसरा महत्वपूर्ण कारण होता है । इसलिए, हर बार लूज़ मोशन की स्थिति में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती है। अपने बाल रोग विशेषज्ञ को अपने बच्चे के इलाज का सबसे अच्छा कोर्स तय करने दें। पेरेंट्स को को डायरिया के ट्रीटमेंट की शुरूआत के लिए सबसे पहला कदम ओआरएस और जिंक के साथ करना चाहिए ।

# 5 मिथक: मेरे बच्चे को डायरिया के दौरान सॉलिड (ठोस) भोजन नहीं खाना चाहिए 

तथ्य: ठोस भोजन बंद बिलकुल नहीं करना चाहिए ! लेकिन अपने बच्चों को ऐसा  भोजन देने से बचने की जरूरत है जो या तो पचाने में मुश्किल हो या फिर अत्यधिक ऑयली और मसालेदार हों। कुछ भी जो घर पर बना हो , दिन में कई बार बच्चे को खिलाया जा सकता है। सेमी सॉलिड या तरल पदार्थ को खाना और पचाना आसान होता है और यही कारण है कि लूज़ मोशन के इलाज के दौरान ऐसा भोजन खिलाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसलिए पेरेंट्स को यही सलाह दी जाती है कि वे बच्चों को खाना खिलाते रहें, और जो शिशु ब्रेस्टफीड पर हों उन्हें डायरिया के दौरान दिन में कई बार ब्रेस्टफीडिंग कराते रहें ।

ये डायरिया से जुड़े कुछ सामान्य मिथक थे, जिनका हम डेली लाइफ में सामना करते हैं। मुझे उम्मीद है कि इस जानकारी से आपको मदद मिलेगी । याद रखें “जानकारी ’किसी बीमारी या उसकी जटिलताओं की रोकथाम की दिशा में पहला कदम है और हमेशा जानकारी हासिल करते रहना बेहतर होता है। अब  अगली बार जब आपका बच्चा डायरिया से पीड़ित होता है, तो घबराने की बजाय तुरंत अपने बाल रोग विशेषज्ञ के पास जाएं और अपने चिकित्सक द्वारा बताई गई सभी बातों का पालन करें।

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